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विकिरण की द्वैत प्रकृति

फोटॉन: ऊर्जा और संवेग

आधुनिक भौतिकी में, प्रकाश को केवल एक तरंग के रूप में नहीं देखा जाता है। इसे ऊर्जा के छोटे-छोटे पैकेटों से बना हुआ भी माना जाता है, जिन्हें फोटॉन कहते हैं। हर फोटॉन में एक निश्चित मात्रा में ऊर्जा और संवेग होता है। NEET जैसी परीक्षाओं के लिए इन मानों की गणना करना महत्वपूर्ण है।

एक फोटॉन की ऊर्जा (EE) उसकी आवृत्ति (nu\\nu) के सीधे आनुपातिक होती है। इसका सूत्र है:

E=hν=hcλE = h\nu = \frac{hc}{\lambda}

इसी तरह, एक फोटॉन का संवेग (pp) उसके तरंगदैर्घ्य (lambda\\lambda) के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

p=hλp = \frac{h}{\lambda}

इन सूत्रों से स्पष्ट है कि उच्च आवृत्ति (या छोटे तरंगदैर्घ्य) वाले प्रकाश, जैसे कि पराबैंगनी प्रकाश, में निम्न आवृत्ति (या लंबे तरंगदैर्घ्य) वाले प्रकाश, जैसे कि लाल प्रकाश, की तुलना में अधिक ऊर्जा और संवेग होता है।

प्रकाश वैद्युत प्रभाव

जब पर्याप्त ऊर्जा वाला प्रकाश किसी धातु की सतह से टकराता है, तो सतह से इलेक्ट्रॉन बाहर निकल जाते हैं। इस घटना को प्रकाश वैद्युत प्रभाव कहा जाता है, और निकलने वाले इलेक्ट्रॉनों को फोटोइलेक्ट्रॉन कहा जाता है।

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हालांकि, हर प्रकाश इलेक्ट्रॉन नहीं निकाल सकता। एक न्यूनतम ऊर्जा की आवश्यकता होती है जिसे धातु का (Phi\\Phi) कहा जाता है। यह किसी धातु से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा है।

इस कार्य फलन से एक न्यूनतम आवृत्ति जुड़ी होती है, जिसे देहली आवृत्ति (nu0\\nu_0) कहा जाता है। यदि आपतित प्रकाश की आवृत्ति nu0\\nu_0 से कम है, तो कोई भी इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं होगा, चाहे प्रकाश की तीव्रता कितनी भी क्यों न हो।

आइंस्टीन का समीकरण और निरोधी विभव

अल्बर्ट आइंस्टीन ने 1905 में प्रकाश वैद्युत प्रभाव को समझाने के लिए एक सरल लेकिन शक्तिशाली समीकरण दिया। उन्होंने प्रस्तावित किया कि एक आपतित फोटॉन अपनी सारी ऊर्जा (hnuh\\nu) एक ही इलेक्ट्रॉन को दे देता है। इस ऊर्जा का एक हिस्सा इलेक्ट्रॉन को धातु से बाहर निकालने (कार्य फलन, Phi\\Phi) में खर्च होता है, और शेष ऊर्जा उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा (KmaxK_{max}) बन जाती है।

Kmax=hνΦK_{max} = h\nu - \Phi

अब, मान लीजिए कि हम इन उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों को रोकना चाहते हैं। हम एक विपरीत वोल्टेज लगाते हैं जिसे (VsV_s) कहा जाता है। यह वह न्यूनतम ऋणात्मक विभव है जो सबसे तेज गति वाले फोटोइलेक्ट्रॉन को भी संग्राहक प्लेट तक पहुंचने से रोक देता है।

जब एक इलेक्ट्रॉन को VsV_s विभव द्वारा रोका जाता है, तो उसकी गतिज ऊर्जा विद्युत स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है। इसलिए, Kmax=eVsK_{max} = eV_s, जहाँ e एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश है।

इन समीकरणों को मिलाकर, हमें NEET के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण संबंध मिलता है:

eVs=hνΦeV_s = h\nu - \Phi

ग्राफिकल विश्लेषण

प्रकाश वैद्युत प्रभाव से संबंधित ग्राफ NEET में अक्सर पूछे जाते हैं। आइए कुछ प्रमुख ग्राफों को समझें।

1. प्रकाश धारा बनाम तीव्रता: यदि आपतित प्रकाश की आवृत्ति देहली आवृत्ति से अधिक है, तो प्रकाश धारा (photocurrent) प्रकाश की तीव्रता के सीधे आनुपातिक होती है। इसका मतलब है कि जितने अधिक फोटॉन सतह पर टकराएंगे, उतने ही अधिक इलेक्ट्रॉन प्रति सेकंड उत्सर्जित होंगे।

2. निरोधी विभव बनाम आवृत्ति: समीकरण eVs=hνΦeV_s = h\nu - \Phi को Vs=(h/e)ν(Φ/e)V_s = (h/e)\nu - (\Phi/e) के रूप में लिखा जा सकता है। यह y=mx+cy = mx + c के रूप में एक सीधी रेखा का समीकरण है।

  • VsV_s बनाम ν\nu का ग्राफ एक सीधी रेखा है।
  • इस रेखा का ढलान h/eh/e है, जो एक सार्वभौमिक स्थिरांक है।
  • रेखा x-अक्ष को देहली आवृत्ति (nu0\\nu_0) पर काटती है, जहाँ Vs=0V_s = 0 होता है।
  • रेखा का y-अवरोधन (y-intercept) Phi/e-\\Phi/e है।

अब जब आपने मूल बातें समझ ली हैं, तो अपनी समझ का परीक्षण करने का समय आ गया है।

Quiz Questions 1/5

प्रकाश वैद्युत प्रभाव की घटना में, यदि आपतित प्रकाश की आवृत्ति दोगुनी कर दी जाए, तो उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

Quiz Questions 2/5

एक धातु के लिए देहली आवृत्ति \nu0\\nu_0\\ है। यदि \nu0/2\\nu_0/2\\ आवृत्ति का प्रकाश उस धातु पर आपतित होता है, तो क्या होगा?

विकिरण और पदार्थ की द्वैत प्रकृति क्वांटम भौतिकी का एक आकर्षक और fondamental स्तंभ है। इन अवधारणाओं में महारत हासिल करना NEET में आपकी सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।