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फ्रांसीसी और रूसी क्रांति

फ्रांसीसी क्रांति: स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व

18वीं सदी के अंत में, फ्रांस सामाजिक और आर्थिक उथल-पुथल का केंद्र था। समाज तीन वर्गों में बंटा हुआ था, जिन्हें 'एस्टेट' कहा जाता था। पहला एस्टेट पादरियों का, दूसरा कुलीनों का और तीसरा आम जनता का था, जिसमें किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग शामिल थे। पहले दो एस्टेट को करों से लगभग पूरी छूट मिली हुई थी, जबकि देश का सारा बोझ तीसरे एस्टेट पर था।

अमेरिकी क्रांति में फ्रांस की भागीदारी ने शाही खजाने को खाली कर दिया था। फसल की विफलता और रोटी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों के जीवन को और भी दयनीय बना दिया। राजा लुई XVI की अयोग्यता और रानी मैरी एंटोनेट की फिजूलखर्ची ने जनता के गुस्से को और भड़का दिया। यह असंतोष 14 जुलाई, 1789 को बैस्टिल के पतन के साथ चरम पर पहुंच गया, जो क्रांति की शुरुआत का प्रतीक है।

आतंक का राज और नेपोलियन का उदय

क्रांति जल्द ही एक हिंसक दौर में प्रवेश कर गई। 1793 से 1794 तक, मैक्समिलियन रोबेस्पिएरे के नेतृत्व में, चला। इस दौरान, 'क्रांति के दुश्मनों' को बिना मुकदमे के गिलोटिन पर चढ़ा दिया गया। हजारों निर्दोष लोग मारे गए। इस अत्यधिक हिंसा और अस्थिरता ने फ्रांस में एक मजबूत नेता की आवश्यकता पैदा की जो व्यवस्था बहाल कर सके।

इसी पृष्ठभूमि में का उदय हुआ। वह एक प्रतिभाशाली सैन्य रणनीतिकार थे, जिन्होंने क्रांतिकारी युद्धों के दौरान फ्रांस को कई जीत दिलाईं। 1799 में, उन्होंने एक तख्तापलट के माध्यम से सत्ता पर कब्जा कर लिया और बाद में 1804 में खुद को फ्रांस का सम्राट घोषित कर दिया। उन्होंने नेपोलियन कोड लागू किया, जिसने कानूनी समानता और संपत्ति के अधिकारों की गारंटी दी, और फ्रांसीसी कानून को हमेशा के लिए बदल दिया।

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नेपोलियन की महत्वाकांक्षा अंततः उनके पतन का कारण बनी। 1812 में रूस पर उनका विनाशकारी आक्रमण और 1815 में वाटरलू की लड़ाई में उनकी अंतिम हार ने उनके शासन का अंत कर दिया। हालाँकि, उनके सुधारों और विजयों ने यूरोप के नक्शे और राजनीति को स्थायी रूप से बदल दिया था।

रूसी क्रांति: एक नई सुबह

20वीं सदी की शुरुआत में, रूस एक विशाल साम्राज्य था जिस पर निरंकुश ज़ार निकोलस द्वितीय का शासन था। अधिकांश आबादी गरीब किसानों की थी, और औद्योगिक श्रमिक कठोर परिस्थितियों में काम करते थे। कार्ल मार्क्स के विचारों से प्रेरित की धारणा बुद्धिजीवियों और श्रमिकों के बीच जोर पकड़ रही थी, जो एक वर्गहीन समाज की वकालत करता था।

असंतोष तब उबल पड़ा जब 22 जनवरी, 1905 को, निहत्थे प्रदर्शनकारियों का एक समूह सेंट पीटर्सबर्ग में ज़ार के विंटर पैलेस की ओर बेहतर काम करने की स्थिति की मांग करते हुए मार्च कर रहा था। सैनिकों ने भीड़ पर गोलियां चला दीं, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए। इस घटना को के रूप में जाना जाता है, जिसने ज़ार के प्रति लोगों के विश्वास को तोड़ दिया और 1905 की क्रांति को जन्म दिया।

इस उथल-पुथल के बीच, रूसी सोशल डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी दो गुटों में विभाजित हो गई: बोल्शेविक, जिसका नेतृत्व व्लादिमीर लेनिन कर रहे थे, और मेन्शेविक।

विशेषताबोल्शेविक (बहुमत)मेन्शेविक (अल्पमत)
नेतृत्वव्लादिमीर लेनिनजूलियस मार्टोव
सदस्यतापेशेवर क्रांतिकारियों का एक छोटा, अनुशासित समूहसभी के लिए खुली एक व्यापक पार्टी
रणनीतितत्काल समाजवादी क्रांतिपूंजीवादी चरण के बाद धीरे-धीरे समाजवाद
निर्णय लेनाकेंद्रीकृत, ऊपर से नीचेअधिक लोकतांत्रिक और समावेशी

प्रथम विश्व युद्ध में रूस की विनाशकारी भागीदारी ने ज़ार शासन पर अंतिम प्रहार किया। 1917 में, दो क्रांतियाँ हुईं। फरवरी क्रांति ने ज़ार को उखाड़ फेंका और एक अनंतिम सरकार की स्थापना की। फिर, अक्टूबर क्रांति में, लेनिन के नेतृत्व में बोल्शेविकों ने सत्ता पर कब्जा कर लिया, जिससे दुनिया का पहला समाजवादी राज्य बना। इन दोनों क्रांतियों ने न केवल अपने-अपने देशों को बदला, बल्कि 20वीं सदी के वैश्विक इतिहास की दिशा भी तय की।

अब जब हमने दोनों क्रांतियों की प्रमुख घटनाओं को कवर कर लिया है, तो आइए कुछ प्रश्नों के साथ अपने ज्ञान का परीक्षण करें।

Quiz Questions 1/6

18वीं सदी के फ्रांस में, करों का अधिकांश बोझ किस एस्टेट पर पड़ता था?

Quiz Questions 2/6

फ्रांसीसी क्रांति के दौरान "आतंक के राज" का नेतृत्व किसने किया था?

फ्रांसीसी और रूसी क्रांतियाँ जटिल घटनाएँ थीं जिन्होंने आधुनिक दुनिया को आकार दिया। उन्होंने दिखाया कि कैसे सामाजिक अन्याय और आर्थिक कठिनाई नाटकीय राजनीतिक परिवर्तन ला सकती है।