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रासायनिक अभिक्रियाएं एवं समीकरण
रासायनिक अभिक्रियाओं की दुनिया
रासायनिक अभिक्रियाएँ हर जगह होती हैं - भोजन के पचने से लेकर लोहे में जंग लगने तक। ये वे प्रक्रियाएँ हैं जिनमें नए पदार्थों का निर्माण होता है। इन प्रक्रियाओं को दर्शाने का सबसे सटीक तरीका रासायनिक समीकरण है।
एक रासायनिक समीकरण में, हम अभिकारकों (reactants) को बाईं ओर और उत्पादों (products) को दाईं ओर लिखते हैं। लेकिन सिर्फ़ यह लिखना काफ़ी नहीं है। समीकरण को संतुलित होना चाहिए, जिसका अर्थ है कि अभिक्रिया के दोनों तरफ़ प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए। यह द्रव्यमान संरक्षण के नियम का पालन करने के लिए आवश्यक है, जो कहता है कि द्रव्यमान को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन मिलकर पानी बनाते हैं। असंतुलित समीकरण ऐसा दिखेगा:
इसे संतुलित करने के लिए, हम अणुओं के सामने गुणांक (coefficients) लगाते हैं। संतुलित समीकरण है:
अभिक्रियाओं के प्रकार
रासायनिक अभिक्रियाओं को उनके पैटर्न के आधार पर कई प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है। आइए कुछ सबसे सामान्य प्रकारों को देखें।
संयोजन अभिक्रिया
noun
एक अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एक एकल उत्पाद बनाते हैं। इसे संश्लेषण अभिक्रिया भी कहा जाता है। सामान्य रूप: A + B → AB
संयोजन अभिक्रिया का एक सरल उदाहरण है जब बिना बुझा चूना (कैल्शियम ऑक्साइड) पानी के साथ मिलकर बुझा हुआ चूना (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड) बनाता है। इस प्रक्रिया में बहुत अधिक ऊष्मा निकलती है।
संयोजन के विपरीत वियोजन अभिक्रिया है। इसमें एक एकल यौगिक टूटकर दो या दो से अधिक सरल पदार्थ बनाता है। इस प्रक्रिया के लिए आमतौर पर ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जैसे ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत।
अगला प्रकार विस्थापन अभिक्रिया है। इसमें एक अधिक प्रतिक्रियाशील तत्व किसी यौगिक से कम प्रतिक्रियाशील तत्व को विस्थापित कर देता है। इसका एक क्लासिक उदाहरण है जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के नीले घोल में डुबोया जाता है। लोहा, तांबे से अधिक प्रतिक्रियाशील होने के कारण, उसे घोल से विस्थापित कर देता है।
द्विविस्थापन अभिक्रिया में, दो यौगिकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है। ये अभिक्रियाएँ अक्सर जलीय घोल में होती हैं और आमतौर पर एक अवक्षेप का निर्माण करती हैं, जो एक अघुलनशील ठोस होता है।
ऑक्सीकरण और अपचयन
रेडॉक्स अभिक्रियाएँ वे होती हैं जिनमें ऑक्सीकरण और अपचयन एक साथ होते हैं। सरल शब्दों में, ऑक्सीकरण ऑक्सीजन का जुड़ना या हाइड्रोजन का हटना है, जबकि अपचयन हाइड्रोजन का जुड़ना या ऑक्सीजन का हटना है। ये दोनों प्रक्रियाएँ हमेशा साथ-साथ होती हैं।
आइए एक उदाहरण देखें। जब कॉपर ऑक्साइड को हाइड्रोजन के साथ गर्म किया जाता है, तो कॉपर और पानी बनते हैं।
हमारे दैनिक जीवन में ऑक्सीकरण के कई प्रभाव होते हैं। दो सबसे आम हैं संक्षारण और विकृतगंधिता।
संक्षारण तब होता है जब कोई धातु अपने आसपास के पदार्थों, जैसे नमी या एसिड, के साथ अभिक्रिया करती है। लोहे में जंग लगना इसका सबसे आम उदाहरण है।
विकृतगंधिता वसा और तेल युक्त खाद्य पदार्थों के ऑक्सीकरण की प्रक्रिया है। जब ये खाद्य पदार्थ हवा के संपर्क में आते हैं, तो वे ऑक्सीकृत हो जाते हैं, जिससे उनकी गंध और स्वाद अप्रिय हो जाते हैं। यही कारण है कि चिप्स के पैकेटों में हवा की जगह नाइट्रोजन गैस भरी जाती है ताकि ऑक्सीकरण को रोका जा सके।
रासायनिक समीकरण को संतुलित क्यों होना चाहिए?
जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के घोल में रखा जाता है, तो घोल का नीला रंग फीका पड़ जाता है। यह किस प्रकार की अभिक्रिया का उदाहरण है?
रासायनिक अभिक्रियाओं और समीकरणों की इन मूल बातों को समझना रसायन विज्ञान की अधिक उन्नत अवधारणाओं के लिए एक ठोस आधार प्रदान करता है।