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वैद्युत आवेश एवं गुण

वैद्युत आवेश और उसके गुण

आपने शायद सर्दियों में स्वेटर उतारते समय चट-चट की आवाज सुनी होगी या अंधेरे में एक छोटी सी चिंगारी देखी होगी। यह अनुभव वैद्युत आवेश (electric charge) के कारण होता है। वैद्युत आवेश पदार्थ का एक मूलभूत गुण है, ठीक द्रव्यमान की तरह। यह पदार्थ को विद्युत और चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करने और अनुभव करने की क्षमता देता है।

दो प्रकार के आवेश होते हैं: धनात्मक (+) और ऋणात्मक (-)। यह नामकरण अमेरिकी वैज्ञानिक ने दिया था। समान प्रकार के आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित (repel) करते हैं, जबकि विपरीत प्रकार के आवेश एक-दूसरे को आकर्षित (attract) करते हैं। आवेश का SI मात्रक कूलॉम (C) है।

आवेश के मूलभूत गुण

वैद्युत आवेश के तीन मौलिक गुण हैं जो इसके व्यवहार को नियंत्रित करते हैं: योज्यता, क्वांटीकरण और संरक्षण।

आवेशों की योज्यता (Additivity of Charges): किसी निकाय का कुल आवेश उसमें मौजूद सभी अलग-अलग आवेशों के बीजीय योग के बराबर होता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी निकाय में +3C, -2C और +5C आवेश हैं, तो कुल आवेश (+3) + (-2) + (+5) = +6C होगा।

आवेश का क्वांटीकरण (Quantization of Charge): इसका मतलब है कि प्रकृति में पाया जाने वाला कोई भी आवेश एक मूल इकाई का पूर्ण गुणज होता है। इस मूल इकाई को इलेक्ट्रॉनिक आवेश (ee) कहते हैं, जिसका मान 1.6×10191.6 \times 10^{-19} C होता है। किसी भी वस्तु पर आवेश ee के छोटे टुकड़ों में नहीं, बल्कि e,2e,3ee, 2e, 3e जैसे पैकेट में मौजूद होता है। कोई भी आवेश 1.5e1.5e या 2.7e2.7e जैसा नहीं हो सकता। ने इस सिद्धांत की प्रयोगात्मक रूप से पुष्टि की थी।

Q=neQ = ne

आवेश का संरक्षण (Conservation of Charge): यह एक सार्वभौमिक नियम है जो कहता है कि एक विलगित निकाय (isolated system) का कुल वैद्युत आवेश हमेशा स्थिर रहता है। आवेश को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है; इसे केवल एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानांतरित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, जब आप एक काँच की छड़ को रेशम से रगड़ते हैं, तो इलेक्ट्रॉन काँच से रेशम में स्थानांतरित हो जाते हैं। काँच की छड़ धनावेशित हो जाती है और रेशम ऋणावेशित हो जाता है, लेकिन दोनों का कुल आवेश शून्य ही रहता है, ठीक वैसे ही जैसे रगड़ने से पहले था।

आवेशन की विधियाँ

किसी वस्तु को आवेशित करने के मुख्य रूप से दो तरीके हैं: चालन और प्रेरण।

चालन (Conduction)

noun

जब एक आवेशित वस्तु को एक अनावेशित (neutral) चालक वस्तु के सीधे संपर्क में लाया जाता है, तो आवेश आवेशित वस्तु से अनावेशित वस्तु में प्रवाहित होता है। संपर्क हटाने के बाद, दोनों वस्तुओं पर समान प्रकार का आवेश वितरित हो जाता है।

प्रेरण द्वारा आवेशन (Charging by Induction): इस विधि में वस्तुओं के बीच कोई सीधा संपर्क नहीं होता है। जब एक आवेशित वस्तु को एक अनावेशित चालक के पास लाया जाता है, तो चालक के मुक्त इलेक्ट्रॉन आवेशित वस्तु के कारण या तो आकर्षित होते हैं या प्रतिकर्षित। इससे चालक के एक सिरे पर एक प्रकार का आवेश और दूसरे सिरे पर विपरीत प्रकार का आवेश जमा हो जाता है। यदि हम चालक को भू-संपर्कित (grounded) कर दें, तो एक प्रकार का आवेश पृथ्वी में चला जाता है। भू-संपर्क हटाने और फिर आवेशित वस्तु को दूर ले जाने पर, चालक पर स्थायी रूप से विपरीत प्रकार का आवेश रह जाता है।

स्वर्ण पत्र विद्युतदर्शी

स्वर्ण पत्र विद्युतदर्शी (), एक सरल उपकरण है जिसका उपयोग किसी वस्तु पर वैद्युत आवेश की उपस्थिति और प्रकृति का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसमें एक धातु की छड़ होती है जिसके एक सिरे पर धातु की डिस्क और दूसरे सिरे पर सोने की दो पतली पत्तियाँ लगी होती हैं। यह पूरी व्यवस्था एक काँच के जार के अंदर होती है।

जब कोई आवेशित वस्तु धातु की डिस्क को छूती है, तो आवेश छड़ से होते हुए सोने की पत्तियों तक पहुँचता है। चूँकि दोनों पत्तियों पर समान आवेश आ जाता है, वे एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती हैं और फैल जाती हैं। पत्तियों के बीच का फैलाव आवेश की मात्रा का सूचक होता है। इस प्रकार, यह उपकरण न केवल आवेश का पता लगाता है बल्कि उसकी मात्रा का एक मोटा अनुमान भी देता है।

Quiz Questions 1/6

विद्युत आवेश के दो प्रकारों, धनात्मक (+) और ऋणात्मक (-), का नामकरण किसने किया था?

Quiz Questions 2/6

आवेश के क्वांटीकरण का सिद्धांत क्या बताता है?

वैद्युत आवेश की यह मौलिक समझ कूलॉम के नियम और विद्युत क्षेत्रों जैसे अधिक जटिल विषयों का अध्ययन करने के लिए आधार तैयार करती है।