कक्षा 10 भौतिक विज्ञान प्रकाश परावर्तन एवं अपवर्तन
गोलीय दर्पण प्रतिबिंब निर्माण
गोलीय दर्पणों से प्रतिबिंब कैसे बनते हैं?
गोलीय दर्पण से किसी वस्तु का प्रतिबिंब कहाँ बनेगा, यह जानने के लिए हम किरण आरेखों का उपयोग करते हैं। वैसे तो वस्तु के हर बिंदु से अनगिनत किरणें निकलती हैं, लेकिन प्रतिबिंब की स्थिति पता लगाने के लिए हमें केवल दो परावर्तित किरणों की आवश्यकता होती है। ये किरणें जहाँ एक-दूसरे को काटती हैं, वहीं प्रतिबिंब बनता है।
आइए उन चार प्रमुख नियमों को समझते हैं जो इन किरणों का पथ तय करते हैं। ये नियम अवतल और उत्तल दोनों दर्पणों पर लागू होते हैं, बस थोड़ी भिन्नता के साथ।
नियम 1: मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली किरण परावर्तन के बाद अवतल दर्पण के मुख्य फोकस (F) से होकर गुजरती है या उत्तल दर्पण के मुख्य फोकस से आती हुई प्रतीत होती है।
दूसरा नियम पहले का ठीक उल्टा है।
नियम 2: अवतल दर्पण के मुख्य फोकस से गुजरने वाली किरण, या उत्तल दर्पण के मुख्य फोकस की ओर निर्देशित किरण, परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समानांतर हो जाती है।
नियम 3: अवतल दर्पण के से गुजरने वाली किरण, या उत्तल दर्पण के वक्रता केंद्र की ओर निर्देशित किरण, परावर्तन के बाद उसी पथ पर वापस लौट जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि किरण दर्पण की सतह पर अभिलंब (90° के कोण पर) टकराती है।
नियम 4: ध्रुव (P) पर से तिर्यक दिशा में आपतित किरण, तिर्यक दिशा में ही परावर्तित हो जाती है। आपतन कोण और परावर्तन कोण बराबर होते हैं।
अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब
अवतल दर्पण द्वारा बनने वाले प्रतिबिंब का आकार, स्थिति और प्रकृति वस्तु की स्थिति पर निर्भर करती है। वस्तु को दर्पण के सामने अलग-अलग जगहों पर रखने से हमें छह अनूठी स्थितियाँ मिलती हैं।
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब का आकार | प्रतिबिंब की प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | फोकस (F) पर | अत्यधिक छोटा, बिंदु आकार | वास्तविक तथा उल्टा |
| C से परे | F तथा C के बीच | छोटा | वास्तविक तथा उल्टा |
| C पर | C पर | समान आकार | वास्तविक तथा उल्टा |
| C तथा F के बीच | C से परे | बड़ा | वास्तविक तथा उल्टा |
| F पर | अनंत पर | अत्यधिक बड़ा | वास्तविक तथा उल्टा |
| P तथा F के बीच | दर्पण के पीछे | बड़ा | आभासी तथा सीधा |
आइए इनमें से दो स्थितियों के लिए किरण आरेख देखें।
ध्यान दें कि जब वस्तु को फोकस और ध्रुव के बीच रखा जाता है, तो अवतल दर्पण एक बनाता है। यह अवतल दर्पण का एकमात्र मामला है जहां प्रतिबिंब सीधा और आभासी होता है। इसी गुण के कारण अवतल दर्पण का उपयोग शेविंग मिरर या मेकअप मिरर के रूप में किया जाता है, क्योंकि यह चेहरे का एक बड़ा और सीधा प्रतिबिंब दिखाता है।
उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब
उत्तल दर्पण के साथ चीजें बहुत सरल हैं। वस्तु को कहीं भी रखा जाए, प्रतिबिंब हमेशा एक जैसा ही बनता है: आभासी, सीधा और वस्तु से छोटा। हम मुख्य रूप से दो स्थितियों पर विचार करते हैं।
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब का आकार | प्रतिबिंब की प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | फोकस (F) पर, दर्पण के पीछे | अत्यधिक छोटा, बिंदु आकार | आभासी तथा सीधा |
| अनंत तथा ध्रुव (P) के बीच | P तथा F के बीच, दर्पण के पीछे | छोटा | आभासी तथा सीधा |
उत्तल दर्पण हमेशा एक छोटा, सीधा और आभासी प्रतिबिंब बनाते हैं। इस गुण के कारण, वे एक व्यापक दृश्य क्षेत्र प्रदान करते हैं। यही कारण है कि उनका उपयोग आमतौर पर वाहनों में के रूप में किया जाता है, जिससे ड्राइवर अपने पीछे एक बड़े क्षेत्र को देख सकते हैं। दुकानों में सुरक्षा दर्पण के रूप में भी इनका उपयोग किया जाता है।
अब जब आप इन नियमों को समझ गए हैं, तो आइए अपने ज्ञान का परीक्षण करें।
अवतल दर्पण के मुख्य फोकस से होकर गुजरने वाली प्रकाश की किरण परावर्तन के बाद क्या होती है?
अवतल दर्पण के वक्रता केंद्र से गुजरने वाली किरण परावर्तन के बाद उसी पथ पर वापस क्यों लौट जाती है?
इन नियमों और स्थितियों का अभ्यास करने से आपको प्रकाशिकी से संबंधित समस्याओं को हल करने में मदद मिलेगी।
