कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 12 विद्युत की संपूर्ण समझ
ओम का नियम
विभवांतर और विद्युत धारा के बीच संबंध
1827 में, एक जर्मन भौतिक विज्ञानी, जॉर्ज साइमन ओम ने पाया कि किसी धातु के तार में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा (I) उसके सिरों के बीच विभवांतर (V) के अनुक्रमानुपाती होती है, बशर्ते उसका तापमान समान रहे। इसे ही ओम का नियम कहा जाता है।
दूसरे शब्दों में, यदि आप किसी चालक के सिरों पर वोल्टेज बढ़ाते हैं, तो उससे प्रवाहित होने वाली धारा भी उसी अनुपात में बढ़ जाएगी। यदि आप वोल्टेज को दोगुना करते हैं, तो धारा दोगुनी हो जाएगी। यह एक सीधा और सरल संबंध है।
इस आनुपातिकता को एक समीकरण में बदलने के लिए, हम एक स्थिरांक का उपयोग करते हैं, जिसे प्रतिरोध (R) कहते हैं। यह समीकरण ओम के नियम का गणितीय रूप है:
प्रतिरोध (R) किसी चालक का वह गुण है जो उससे प्रवाहित होने वाले आवेश के प्रवाह का विरोध करता है। यह मापता है कि कोई घटक विद्युत धारा के प्रवाह को कितना रोकता है। प्रतिरोध का SI मात्रक ओम है, जिसे ग्रीक अक्षर ओमेगा (Ω) द्वारा दर्शाया जाता है।
ओम
noun
यदि किसी चालक के दो सिरों के बीच विभवांतर 1 वोल्ट है और उससे 1 एम्पीयर विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उस चालक का प्रतिरोध 1 ओम (Ω) होता है।
V-I ग्राफ
जब हम किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर (V) को y-अक्ष पर और उससे प्रवाहित होने वाली धारा (I) को x-अक्ष पर आलेखित करते हैं, तो हमें एक सीधी रेखा मिलती है जो मूल बिंदु से होकर गुजरती है। इस ग्राफ को V-I ग्राफ कहते हैं।
इस ग्राफ की ढलान (slope) हमें प्रतिरोध का मान देती है। जैसा कि आप जानते हैं, ढलान y-अक्ष में परिवर्तन को x-अक्ष में परिवर्तन से विभाजित करके निकाली जाती है।
ओम के नियम का प्रायोगिक सत्यापन
ओम के नियम को सत्यापित करने के लिए, हम एक परिपथ बनाते हैं। इस परिपथ में एक प्रतिरोधक, एक बैटरी, एक कुंजी (स्विच), एक धारा नियंत्रक (रियोस्टेट), एक एमीटर और एक वोल्टमीटर होता है।
एमीटर को हमेशा प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है ताकि वह परिपथ से बहने वाली कुल धारा को माप सके। वोल्टमीटर को प्रतिरोधक के सिरों के बीच समांतर क्रम में जोड़ा जाता है ताकि वह उसके सिरों के बीच विभवांतर को माप सके।
धारा नियंत्रक (रियोस्टेट) का उपयोग करके, हम परिपथ में प्रतिरोध को बदल सकते हैं, जिससे धारा का मान बदल जाता है। प्रत्येक बार जब हम धारा बदलते हैं, तो हम एमीटर में धारा (I) की रीडिंग और वोल्टमीटर में विभवांतर (V) की रीडिंग को नोट करते हैं। जब हम इन मानों का उपयोग करके V/I अनुपात की गणना करते हैं, तो हम पाते हैं कि यह लगभग स्थिर रहता है। यह ओम के नियम को सिद्ध करता है।
अब जब आप ओम के नियम को समझ गए हैं, तो आइए कुछ प्रश्नों के साथ अपने ज्ञान का परीक्षण करें।
ओम के नियम के अनुसार, यदि तापमान स्थिर रहता है तो किसी चालक में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा (I) किसके अनुक्रमानुपाती होती है?
विभवांतर (V) और धारा (I) के बीच खींचे गए V-I ग्राफ की ढलान (slope) क्या दर्शाती है?
ओम का नियम विद्युत परिपथों को समझने के लिए एक मौलिक सिद्धांत है। यह हमें बताता है कि वोल्टेज, धारा और प्रतिरोध कैसे एक दूसरे से संबंधित हैं, जो हमें परिपथों का विश्लेषण और डिजाइन करने की अनुमति देता है।