उर्दू पढ़ना और लिखना सीखें
वर्णमाला और ध्वन्यात्मकता
वर्णमाला और ध्वनियाँ
उर्दू वर्णमाला में कुल 39 अक्षर होते हैं, जो अलिफ़ से शुरू होकर ये पर समाप्त होते हैं। चूँकि आप हिंदी से परिचित हैं, इसलिए कई ध्वनियाँ आपको जानी-पहचानी लगेंगी। लेकिन कुछ महत्वपूर्ण अंतर भी हैं, खासकर उन अक्षरों में जहाँ नुक्ता (बिंदु) का प्रयोग होता है।
यह नुक्ता अक्षर के उच्चारण को पूरी तरह बदल देता है, जिससे ऐसी ध्वनियाँ बनती हैं जो आमतौर पर देवनागरी लिपि में नहीं होतीं। ये ध्वनियाँ उर्दू को उसका खास संगीतमय और कोमल अंदाज़ देती हैं।
नुक्ता वाले अक्षर
चलिए उन पाँच प्रमुख अक्षरों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जहाँ नुक्ता का प्रयोग हिंदी और उर्दू के उच्चारण में सबसे बड़ा अंतर पैदा करता है। ये ध्वनियाँ अरबी और फ़ारसी भाषाओं से आई हैं। इन्हें सही ढंग से उच्चारित करने से आपकी उर्दू बेहतर हो जाएगी।
इनका उच्चारण गले के थोड़ा और गहरे हिस्से से होता है। अभ्यास के लिए, इन अक्षरों वाले शब्दों को ज़ोर से बोलने की कोशिश करें।
| हिंदी अक्षर | उर्दू अक्षर (नुक्ता के साथ) | उच्चारण का अंतर |
|---|---|---|
| क | क़ (क़ाफ़) | 'क' की ध्वनि कंठ के सामने से आती है, जबकि 'क़' की ध्वनि कंठ के बहुत पीछे, गले के अंदर से आती है। जैसे 'कलम' नहीं, 'क़लम'। |
| ख | ख़ (ख़े) | 'ख' की तरह ही, लेकिन इसमें एक हल्की ख़राश होती है, जैसे गले को साफ़ करते समय होने वाली ध्वनि। जैसे 'ख़त' और 'ख़बर'। |
| ग | ग़ (ग़ैन) | यह 'ग' से बहुत अलग है। इसका उच्चारण गरारे करने जैसी ध्वनि के साथ होता है। जैसे 'ग़ज़ल' या 'ग़लत'। |
| ज | ज़ (ज़े) | 'ज' में जीभ दाँतों के पीछे लगती है। 'ज़' में हल्की कंपन होती है और ध्वनि मधुमक्खी की भिनभिनाहट (buzzing) जैसी होती है। जैसे 'ज़मीन' और 'आवाज़'। |
| फ | फ़ (फ़े) | 'फ' में दोनों होंठ मिलते हैं, जबकि 'फ़' का उच्चारण करते समय ऊपरी दाँत निचले होंठ को छूते हैं, जैसे अंग्रेज़ी के 'F' में होता है। जैसे 'सिर्फ़' और 'फ़र्क'। |
एक ध्वनि, कई अक्षर
उर्दू सीखते समय एक और दिलचस्प बात सामने आती है: एक ही ध्वनि के लिए कई अक्षर होते हैं। उदाहरण के लिए, हिंदी में 'स' ध्वनि के लिए सिर्फ एक अक्षर 'स' है, लेकिन उर्दू में इसके लिए तीन अक्षर हैं: س (सीन), ص (स्वाद), और ث (से)।
इसी तरह, 'ज़' ध्वनि के लिए चार अक्षर हैं: ز (ज़े), ذ (ज़ाल), ض (ज़्वाद), और ظ (ज़ोए)। ऐसा क्यों है? इसका कारण उर्दू का इतिहास है। उर्दू ने अरबी और फ़ारसी से बहुत सारे शब्द लिए हैं, और उन शब्दों के साथ उनके मूल अक्षर भी ले लिए।
अरबी में, ये सभी अक्षर अलग-अलग ध्वनियाँ देते थे। लेकिन समय के साथ, हिंदुस्तानी बोली में ये ध्वनियाँ एक जैसी हो गईं। इसलिए, आज बोलते समय तो ये एक जैसे लगते हैं, लेकिन लिखते समय सही वर्तनी के लिए यह जानना ज़रूरी है कि किस शब्द में कौन-सा अक्षर इस्तेमाल होगा। यह अभ्यास के साथ आता है।
शुरुआत में, इन समान लगने वाले अक्षरों से घबराने की ज़रूरत नहीं है। जैसे-जैसे आप उर्दू पढ़ेंगे और सुनेंगे, आपकी आँखें और कान सही अक्षरों को पहचानने के आदी हो जाएँगे। मुख्य ध्यान पहले उन नुक्ता वाली ध्वनियों पर रखें जो उच्चारण में स्पष्ट अंतर पैदा करती हैं।
अब जब आप इन ध्वन्यात्मक बारीकियों को समझ गए हैं, तो आइए कुछ अभ्यासों से अपने ज्ञान को परखें।
उर्दू वर्णमाला में कुल कितने अक्षर होते हैं?
उर्दू अक्षरों में 'नुक्ता' (बिंदु) का मुख्य कार्य क्या है?