नीट आधुनिक भौतिकी मास्टरक्लास
फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव विश्लेषण
आइंस्टीन का प्रकाश वैद्युत समीकरण
प्रकाश वैद्युत प्रभाव को समझने का आधार आइंस्टीन का समीकरण है। यह ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है। जब hf ऊर्जा का एक फोटॉन किसी धातु की सतह पर गिरता है, तो इसकी ऊर्जा दो भागों में उपयोग होती है:
- इलेक्ट्रॉन को धातु की सतह से बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा, जिसे [{<कार्य फलन>}] (Φ) कहते हैं।
- शेष ऊर्जा उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन को अधिकतम गतिज ऊर्जा (K_max) प्रदान करती है।
कार्य फलन (Φ) वह न्यूनतम ऊर्जा है जो किसी धातु से एक इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक होती है। यदि आपतित फोटॉन की ऊर्जा कार्य फलन से कम है, तो कोई भी इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं होगा, चाहे प्रकाश की तीव्रता कितनी भी क्यों न हो।
जिस न्यूनतम आवृत्ति पर इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन शुरू होता है, उसे देहली आवृत्ति (threshold frequency, ) कहते हैं। इसका संबंध कार्य फलन से है:
इस मान को मुख्य समीकरण में रखने पर, हमें मिलता है:
निरोधी विभव और आवृत्ति का ग्राफ
उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों को रोकने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऋणात्मक विभव को निरोधी विभव (Stopping Potential, ) कहते हैं। यह अधिकतम गतिज ऊर्जा से संबंधित है:
अब हम के दोनों समीकरणों को बराबर कर सकते हैं:
इस ग्राफ से कुछ महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकलते हैं:
- ढलान (Slope): ग्राफ का ढलान के बराबर होता है, जो एक सार्वभौमिक स्थिरांक है। इसका मतलब है कि सभी धातुओं के लिए यह ग्राफ समानांतर सीधी रेखाएँ होती हैं।
- Y-अवरोधन (Y-intercept): रेखा y-अक्ष को पर काटती है। इससे हम धातु का कार्य फलन (Φ) ज्ञात कर सकते हैं।
- X-अवरोधन (X-intercept): रेखा x-अक्ष को देहली आवृत्ति () पर काटती है।
तीव्रता और फोटॉन संवेग
अब हम अन्य कारकों पर विचार करें।
तीव्रता बनाम प्रकाश वैद्युत धारा प्रकाश की तीव्रता का अर्थ है प्रति इकाई क्षेत्रफल में प्रति सेकंड आपतित होने वाले फोटॉनों की संख्या। यदि आपतित प्रकाश की आवृत्ति देहली आवृत्ति से अधिक है, तो प्रकाश वैद्युत धारा (photocurrent) प्रकाश की तीव्रता के सीधे आनुपातिक होती है।
अधिक तीव्रता का मतलब है अधिक फोटॉन, जो अधिक इलेक्ट्रॉनों को उत्सर्जित करते हैं, जिससे धारा बढ़ जाती है। हालांकि, तीव्रता बढ़ाने से प्रत्येक इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा नहीं बढ़ती है; वह केवल आवृत्ति पर निर्भर करती है।
फोटॉन का संवेग हालांकि एक फोटॉन का विराम द्रव्यमान शून्य होता है, लेकिन इसमें ऊर्जा होती है और इसलिए संवेग भी होता है। एक फोटॉन का संवेग () उसकी ऊर्जा () से संबंधित होता है:
डी ब्रोगली तरंगदैर्घ्य
लुई डी ब्रोगली ने सुझाव दिया कि जिस तरह प्रकाश में कण और तरंग दोनों के गुण होते हैं, उसी तरह पदार्थ के कणों (जैसे इलेक्ट्रॉन) में भी तरंग प्रकृति होनी चाहिए। किसी कण से जुड़ी तरंगदैर्घ्य को डी ब्रोगली तरंगदैर्घ्य () कहा जाता है।
NEET के लिए, डी ब्रोगली तरंगदैर्घ्य के विभिन्न रूपों को जानना महत्वपूर्ण है, खासकर एक इलेक्ट्रॉन के लिए जिसे वोल्ट के विभवांतर से त्वरित किया गया हो:
| कण | गतिज ऊर्जा (K) के पदों में | विभव (V) के पदों में |
|---|---|---|
| कोई भी कण | - | |
| इलेक्ट्रॉन | Å |
इलेक्ट्रॉन के लिए विभव वाला सूत्र बहुत उपयोगी है और सीधे प्रश्नों को हल करने में मदद करता है। याद रखें कि यह परिणाम Ångströms (Å) में है।
आइए कुछ प्रश्नों को हल करने का प्रयास करें।
आइंस्टीन का प्रकाश वैद्युत समीकरण किस संरक्षण नियम पर आधारित है?
यदि किसी धातु की सतह पर आपतित प्रकाश की आवृत्ति देहली आवृत्ति () से कम हो, तो क्या होगा?
यह विश्लेषण आपको प्रकाश वैद्युत प्रभाव से संबंधित नीट के प्रश्नों को हल करने के लिए एक ठोस आधार प्रदान करता है।