कक्षा 10 भूगोल संसाधन एवं विकास
सतत पोषणीय विकास
सतत पोषणीय विकास
विकास हर देश का लक्ष्य है, लेकिन सवाल यह है कि विकास किस कीमत पर हो? अक्सर, आर्थिक विकास के नाम पर संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग किया जाता है, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचता है। इससे न केवल प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी एक बड़ा संकट खड़ा करता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए सतत पोषणीय विकास की अवधारणा सामने आई।
सतत पोषणीय विकास
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एक ऐसी विकास प्रक्रिया जिसमें वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संसाधनों का उपयोग इस तरह से किया जाता है कि भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों से कोई समझौता न हो। इसका मूल सिद्धांत पर्यावरण को बिना नुकसान पहुँचाए विकास करना है।
संसाधन नियोजन के वैश्विक प्रयास
बीसवीं सदी के अंत तक, दुनिया भर के देश यह महसूस करने लगे थे कि संसाधनों की कमी और पर्यावरण प्रदूषण एक वैश्विक समस्या है, जिसका समाधान किसी एक देश के बस में नहीं है। इस साझा चिंता ने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को जन्म दिया। इसी दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम 1992 में उठाया गया।
जून 1992 में, ब्राजील के शहर रियो डी जनेरियो में 100 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष के लिए एकत्रित हुए। यह पहला अंतर्राष्ट्रीय पृथ्वी सम्मेलन था, जिसका आयोजन वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक विकास की तत्काल समस्याओं पर चर्चा के लिए किया गया था। इस सम्मेलन में नेताओं ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और वानिकी से संबंधित महत्वपूर्ण घोषणापत्रों पर हस्ताक्षर किए।
रियो सम्मेलन ने सतत पोषणीय विकास की अवधारणा को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में ला दिया और एजेंडा 21 को अपनाया, जो 21वीं सदी में इसे हासिल करने की एक व्यापक कार्ययोजना थी।
एजेंडा 21
संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्वीकृत एक घोषणा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक सतत पोषणीय विकास को प्राप्त करना है। यह एक विस्तृत कार्य-सूची है जो पर्यावरण क्षति, गरीबी और रोगों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग पर जोर देती है। इसका एक मुख्य उद्देश्य यह है कि प्रत्येक स्थानीय निकाय अपना स्वयं का स्थानीय एजेंडा 21 तैयार करे।
| सिद्धांत | उद्देश्य |
|---|---|
| साझी जिम्मेदारी | पर्यावरण की सुरक्षा और विकास की जिम्मेदारी सभी देशों की है, लेकिन विकसित देशों की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण है। |
| गरीबी उन्मूलन | गरीबी और पर्यावरणीय गिरावट के बीच के चक्र को तोड़ना, क्योंकि गरीब समुदाय अक्सर अपने अस्तित्व के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहते हैं। |
| स्थानीय कार्रवाई | वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्थानीय स्तर पर योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू करना। |
| संसाधनों का संरक्षण | प्राकृतिक संसाधनों जैसे जल, जंगल और जैव विविधता का संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना। |
संक्षेप में, रियो सम्मेलन और एजेंडा 21 ने दुनिया को यह समझने में मदद की कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। एक के बिना दूसरे को हासिल नहीं किया जा सकता। सतत पोषणीय विकास केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारे ग्रह के भविष्य के लिए एक आवश्यकता है।
अब जब आप सतत पोषणीय विकास और इससे जुड़ी वैश्विक पहलों को समझ गए हैं, तो आइए कुछ प्रश्नों के साथ अपने ज्ञान का परीक्षण करें।
पहला अंतर्राष्ट्रीय पृथ्वी सम्मेलन कहाँ और कब आयोजित किया गया था?
एजेंडा 21 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
सतत पोषणीय विकास यह सुनिश्चित करता है कि हम आज की जरूरतों को पूरा करते हुए आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करें।
