यूपी बोर्ड कक्षा 10 हिंदी परीक्षा सफलता मार्गदर्शिका
गद्य साहित्य एवं व्याख्या
गद्य साहित्य और व्याख्या की कला
हिंदी गद्य साहित्य का इतिहास बहुत लंबा नहीं है, लेकिन इसका विकास बहुत तेज़ी से हुआ। आपके पाठ्यक्रम में मुख्य रूप से शुक्ल युग और शुक्लोत्तर युग पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
गद्य
noun
साहित्य का वह रूप जो छंद, तुक और लय से मुक्त होता है और जिसमें विचारों को सहज भाषा में व्यक्त किया जाता है। कहानी, निबंध, उपन्यास आदि गद्य की विधाएँ हैं।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल को हिंदी गद्य का प्रमुख स्तंभ माना जाता है। उनके समय को 'शुक्ल युग' (लगभग 1919-1938) कहा जाता है। इस युग में निबंध, समालोचना और कहानी जैसी विधाओं का जबरदस्त विकास हुआ। भाषा गंभीर और विचारपूर्ण हो गई।
शुक्ल युग के बाद का समय 'शुक्लोत्तर युग' (लगभग 1938 से अब तक) कहलाता है। इस दौर में हजारी प्रसाद द्विवेदी, महादेवी वर्मा और रामधारी सिंह 'दिनकर' जैसे लेखकों ने गद्य को और समृद्ध किया। इसमें कहानी, उपन्यास, नाटक और रिपोर्ताज जैसी नई विधाओं में खूब लिखा गया।
गद्यांश की व्याख्या कैसे करें
परीक्षा में गद्य खंड से 6 अंकों का एक प्रश्न आता है। इसमें एक गद्यांश दिया जाता है और उसके नीचे तीन प्रश्न होते हैं। हर प्रश्न 2 अंक का होता है।
- संदर्भ लिखिए।
- रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
- तथ्यपरक प्रश्न का उत्तर दीजिए।
आइए, इन तीनों को लिखने का सही तरीका समझते हैं। 'मित्रता' पाठ से एक उदाहरण लेते हैं।
"विश्वासपात्र मित्र से बड़ी भारी रक्षा रहती है। जिसे ऐसा मित्र मिल जाए, उसे समझना चाहिए कि खजाना मिल गया। विश्वासपात्र मित्र जीवन की एक औषध है। हमें अपने मित्रों से यह आशा रखनी चाहिए कि वे उत्तम संकल्पों से हमें दृढ़ करेंगे, दोषों और त्रुटियों से हमें बचाएंगे।"
मान लीजिए, इस गद्यांश में दूसरी और तीसरी पंक्ति रेखांकित है। अब देखते हैं कि इसके प्रश्नों के उत्तर कैसे लिखेंगे।
चरण 1: संदर्भ लिखना
संदर्भ में दो बातें लिखनी होती हैं: पाठ का नाम और लेखक का नाम। इसे लिखने का एक मानक तरीका है जो हमेशा काम आता है।
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिंदी' के गद्य-खंड में संकलित 'मित्रता' नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक आचार्य रामचंद्र शुक्ल हैं।
इस प्रारूप को याद कर लें। बस पाठ और लेखक का नाम बदलना होगा। आपको पूरे 2 अंक मिलेंगे।
चरण 2: रेखांकित अंश की व्याख्या
यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहाँ आपको रेखांकित पंक्तियों का अर्थ अपने शब्दों में समझाना होता है। सिर्फ पर्यायवाची शब्द लिख देना काफी नहीं है। आपको उस पंक्ति का भाव स्पष्ट करना होगा।
रेखांकित अंश: "जिसे ऐसा मित्र मिल जाए, उसे समझना चाहिए कि खजाना मिल गया। विश्वासपात्र मित्र जीवन की एक औषध है।"
इसकी व्याख्या कैसे करें? पहले सोचें कि लेखक क्या कहना चाहता है। यहाँ 'खजाना' और 'औषध' का क्या मतलब है?
व्याख्या: लेखक आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी कहते हैं कि एक भरोसेमंद दोस्त मिलना किसी अनमोल खजाने के मिलने जैसा है। जिस तरह खजाना हमारे जीवन की आर्थिक समस्याओं को दूर करता है, उसी तरह एक अच्छा मित्र हमारे जीवन की हर कठिनाई में सहारा बनता है। लेखक मित्र की तुलना एक दवा से भी करते हैं। जिस प्रकार एक अच्छी दवा हमारे शरीर के रोगों को दूर करके हमें स्वस्थ बनाती है, उसी प्रकार एक विश्वसनीय मित्र हमारे मन के दुखों और दोषों को दूर करके हमें एक बेहतर इंसान बनाता है।
देखिए, हमने 'खजाना' और 'औषध' शब्दों का केवल अर्थ नहीं लिखा, बल्कि उनके भाव को जीवन से जोड़कर समझाया। यही व्याख्या करने की कला है।
चरण 3: तथ्यपरक प्रश्न
यह प्रश्न सीधे गद्यांश पर आधारित होता है। इसका उत्तर आपको गद्यांश में ही मिल जाएगा। आपको बस उसे ध्यान से पढ़कर अपने शब्दों में लिखना है।
उदाहरण के लिए, ऊपर दिए गए गद्यांश पर आधारित प्रश्न हो सकता है: प्रश्न: हमें अपने मित्रों से क्या आशा रखनी चाहिए?
उत्तर: हमें अपने मित्रों से यह आशा रखनी चाहिए कि वे हमें अच्छे कामों के लिए प्रोत्साहित करेंगे और हमारी गलतियों और बुराइयों से हमारी रक्षा करेंगे।
यह उत्तर सीधे गद्यांश की आखिरी पंक्ति से लिया गया है। इस तरह, अगर आप इन तीनों चरणों का सही ढंग से पालन करें, तो आप आसानी से 6 में से 6 अंक पा सकते हैं।
अब 'ममता' पाठ (लेखक: जयशंकर प्रसाद) और 'भारतीय संस्कृति' (लेखक: डॉ. राजेंद्र प्रसाद) के अध्यायों का भी इसी तरह अभ्यास करें। हर पाठ के लेखक का नाम याद रखना बहुत ज़रूरी है।
परीक्षा के प्रश्नों और उत्तरों को लिखने का अभ्यास करें।
चलिए कुछ अभ्यास प्रश्नों से अपनी समझ को परखते हैं।
शुक्ल युग का प्रमुख कालखंड क्या माना जाता है?
गद्यांश पर आधारित प्रश्न में 'संदर्भ' लिखने के लिए किन दो बातों का उल्लेख करना अनिवार्य है?